यत्किञ्चिन्मनसा ग्राह्यं यद्ग्राह्यं चक्षुरादिभि:।
बुद्ध्या च यत्परिच्छेद्यं तद्रूपमखिलं तव॥ १९॥
अनुवाद
जो कुछ मन से कल्पित होता है, जो कुछ नेत्र आदि इन्द्रियों से देखा जा सकता है, जो कुछ बुद्धि से सोचा जा सकता है, वे सब आपके ही स्वरूप हैं ॥19॥
Whatever is conceived by the mind, whatever can be perceived by the senses such as the eyes, etc., whatever can be thought about by the intellect, all of them are Your form. ॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥