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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 4: ब्रह्माजीकी उत्पत्ति वराहभगवान्द्वारा पृथिवीका उद्धार और ब्रह्माजीकी लोक-रचना
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श्लोक 18
श्लोक
1.4.18
त्वामाराध्य परं ब्रह्म याता मुक्तिं मुमुक्षव:।
वासुदेवमनाराध्य को मोक्षं समवाप्स्यति॥ १८॥
अनुवाद
केवल परब्रह्म की पूजा करने से ही मोक्ष के साधक मुक्त हो सकते हैं। वासुदेव की पूजा किए बिना कौन मोक्ष प्राप्त कर सकता है?॥18॥
Only by worshipping the Supreme Brahman can the seekers of liberation be liberated. Who can attain salvation without worshipping Vasudeva?॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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