श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 4: ब्रह्माजीकी उत्पत्ति वराहभगवान‍्द्वारा पृथिवीका उद्धार और ब्रह्माजीकी लोक-रचना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.4.14 
नमस्ते परमात्मात्म न‍् पुरुषात्म न‍् नमोऽस्तु ते।
प्रधानव्यक्तभूताय कालभूताय ते नम:॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषोत्तम! आपको नमस्कार है। हे पुरुषात्मा! आपको नमस्कार है। हे मूल (कारण) और व्यक्त (कार्य) रूप! आपको नमस्कार है। हे कालरूप! आपको बारंबार नमस्कार है॥ 14॥
 
O Supreme Being! Salutations to you. O Purushaatman! Salutations to you. O Principal (cause) and manifest (effect) form! Salutations to you. O Form of Time! Salutations to you again and again.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)