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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 4: ब्रह्माजीकी उत्पत्ति वराहभगवान्द्वारा पृथिवीका उद्धार और ब्रह्माजीकी लोक-रचना
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श्लोक 13
श्लोक
1.4.13
त्वयाहमु द्धृ ता पूर्वं त्वन्मयाहं जनार्दन।
तथान्यानि च भूतानि गगनादीन्यशेषत:॥ १३ ॥
अनुवाद
हे जनार्दन! आपने पहले भी मेरा उद्धार किया था। तथा हे प्रभु! आप ही मेरे तथा आकाश आदि समस्त तत्त्वों के उपादान कारण हैं ॥13॥
O Janardan! You had saved me earlier also. And O Lord! You are the material cause of me and all other elements like sky etc. ॥13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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