श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 4: ब्रह्माजीकी उत्पत्ति वराहभगवान‍्द्वारा पृथिवीका उद्धार और ब्रह्माजीकी लोक-रचना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.4.12 
पृथिव्युवाच
नमस्ते पुण्डरीकाक्ष शङ्खचक्रगदाधर।
मामुद्धरास्मादद्य त्वं त्वत्तोऽहं पूर्वमुत्थिता॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी बोली, "हे कमल-नेत्र वाले, शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करने वाले प्रभु! मैं आपको नमस्कार करती हूँ। आज आप मुझे इस पाताल लोक से छुड़ाइए। मैं पूर्वकाल में आपसे ही उत्पन्न हुई हूँ।"
 
Earth said, "O Lord with lotus eyes and holding conch, discus, mace and lotus! I salute you. Today, please rescue me from this netherworld. I was born from you in the past."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)