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श्लोक 1.3.28  |
द्वितीयस्य परार्द्धस्य वर्तमानस्य वै द्विज।
वाराह इति कल्पोऽयं प्रथम: परिकीर्तित:॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| हे द्विज! इस समय इस कल्प का वर्तमान दूसरा भाग प्रथम वराह कल्प कहा जाता है। 28। |
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| O twice born! At this time the present second half of this cycle is said to be the first Varaha kalpa. 28. |
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| इति श्रीविष्णुपुराणे प्रथमेंऽशे तृतीयोऽध्याय:॥३॥ |
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