श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 3: ब्रह्मादिकी आयु और कालका स्वरूप  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.3.28 
द्वितीयस्य परार्द्धस्य वर्तमानस्य वै द्विज।
वाराह इति कल्पोऽयं प्रथम: परिकीर्तित:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज! इस समय इस कल्प का वर्तमान दूसरा भाग प्रथम वराह कल्प कहा जाता है। 28।
 
O twice born! At this time the present second half of this cycle is said to be the first Varaha kalpa. 28.
 
इति श्रीविष्णुपुराणे प्रथमेंऽशे तृतीयोऽध्याय:॥३॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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