श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 3: ब्रह्मादिकी आयु और कालका स्वरूप  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.3.17 
सप्तर्षय: सुरा: शक्रो मनुस्तत्सूनवो नृपा:।
एककाले हि सृज्यन्ते संह्रियन्ते च पूर्ववत्॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
सप्तर्षि, देवता, इन्द्र, मनु और मनु के पुत्र राजा, ये सब एक ही काल में उत्पन्न होते हैं और एक ही काल में नष्ट हो जाते हैं ॥17॥
 
The Saptarishis, the gods, Indra, Manu and the kings who are the sons of Manu are all created in the same time period and are destroyed in the same time period. ॥17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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