श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 3: ब्रह्मादिकी आयु और कालका स्वरूप  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.3.15 
कृतं त्रेता द्वापरश्च कलिश्चैव चतुर्युगम्।
प्रोच्यते तत्सहस्रं च ब्रह्मणो दिवसं मुने॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
हे ऋषि! सत्य, त्रेता, द्वापर और कलियुग मिलकर चतुर्युग कहलाते हैं; ऐसे एक हजार चतुर्युग का ब्रह्मा का एक दिन होता है॥15॥
 
O sage! The Satya, Treta, Dwapara and Kali periods together are known as the Chaturyuga; a thousand such Chaturyuga forms one day of Brahma.॥15॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd