vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 22: विष्णु भगवान्की विभूति और जगत्की व्यवस्थाका वर्णन
»
श्लोक 79
श्लोक
1.22.79
कलाकाष्ठानिमेषादिदिनर्त्वयनहायनै:।
कालस्वरूपो भगवानपापो हरिरव्यय:॥ ७९॥
अनुवाद
काल, काष्ठा, निमेष, दिन, ऋतु, अयन और वर्ष के रूप में पापरहित अव्यय श्री हरि ही काल के रूप में विद्यमान रहते हैं ॥79॥
In the form of Kala, Kashtha, Nimesh, day, season, ayana and year, the sinless Avaya Shri Hari is present in the form of time. 79॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×