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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 22: विष्णु भगवान्की विभूति और जगत्की व्यवस्थाका वर्णन
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श्लोक 40
श्लोक
1.22.40
एवमेष जगत्स्रष्टा जगत्पाता तथा जगत्।
जगद्भक्षयिता देव: समस्तस्य जनार्दन:॥ ४०॥
अनुवाद
इस प्रकार वे जनार्दनदेव सम्पूर्ण जगत् के रचयिता, पालक और संहारक हैं तथा वे स्वयं जगत् के स्वरूप हैं ॥40॥
Thus, that Janardandev is the creator, preserver and destroyer of the entire universe and He is the very form of the universe itself. ॥40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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