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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 21: कश्यपजीकी अन्य स्त्रियोंके वंश एवं मरुद्गणकी उत्पत्तिका वर्णन
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श्लोक 20
श्लोक
1.21.20
काद्रवेयास्तु बलिन: सहस्रममितौजस:।
सुपर्णवशगा ब्रह्मन् जज्ञिरे नैकमस्तका:॥ २०॥
अनुवाद
कद्रू के पुत्र भी हजारों शक्तिशाली और तेजस्वी अनेक सिर वाले सर्प थे, जो भगवान गरुड़ के अधीन थे।
And the sons of Kadru were also thousands of mighty and illustrious many-headed serpents who were under the control of Lord Garuda.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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