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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 21: कश्यपजीकी अन्य स्त्रियोंके वंश एवं मरुद्गणकी उत्पत्तिका वर्णन
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श्लोक 18
श्लोक
1.21.18
विनतायास्तु द्वौ पुत्रौ विख्यातौ गरुडारुणौ।
सुपर्ण: पततां श्रेष्ठो दारुण: पन्नगाशन:॥ १८॥
अनुवाद
विनता के दो पुत्र गरुड़ और अरुण बहुत प्रसिद्ध हैं। इनमें पक्षियों में श्रेष्ठ सुपर्ण (गरुड़जी) बड़े भयंकर हैं और सर्पों को खाते हैं। 18.
Vinata's two sons Garuda and Arun are very famous. Among these, the best among the birds, Suparna (Garudaji) is very fierce and eats snakes. 18.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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