श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 20: प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति और भगवान‍्का आविर्भाव  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.20.9 
प्रह्लाद उवाच
ॐ नम: परमार्थार्थ स्थूलसूक्ष्म क्षराक्षर।
व्यक्ताव्यक्त कलातीत सकलेश निरञ्जन॥ ९॥
 
 
अनुवाद
प्रह्लादजी कहने लगे - हे परमार्थ! हे अर्थ (दृश्य रूप)! हे स्थूल और सूक्ष्म (जाग्रत और स्वप्न रूप में)! हे क्षराक्षर (कारण रूप)! हे साक्षात (दृश्य रूप)! हे कलाहीन! हे सकलेश्वर! हे निरंजन देव! आपको नमस्कार है॥9॥
 
Prahladji started saying – O Parmarth! O meaning (visual form)! O gross and subtle (in the form of waking and dreaming)! Hey Ksharakshar (causal form)! O personified (visual form)! O artless! Hey Sakaleshwar! Hey Niranjan Dev! Greetings to you. 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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