|
| |
| |
श्लोक 1.20.39  |
प्रह्लादं सकलापत्सु यथा रक्षितवान्हरि:।
तथा रक्षति यस्तस्य शृणोति चरितं सदा॥ ३९॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| जैसे भगवान ने प्रह्लाद को सब संकटों से बचाया था, उसी प्रकार वे अपनी कथा सुननेवालों की भी सदैव रक्षा करते हैं ॥39॥ |
| |
| Just as the Lord protected Prahlada from all difficulties, in the same manner He always protects those who listen to His stories. ॥ 39॥ |
| |
| इति श्रीविष्णुपुराणे प्रथमेंऽशे विंशोऽध्याय:॥ २०॥ |
| |
| ✨ ai-generated |
| |
|