श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 20: प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति और भगवान‍्का आविर्भाव  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.20.38 
पौर्णमास्याममावास्यामष्टम्यामथ वा पठन्।
द्वादश्यां वा तदाप्नोति गोप्रदानफलं द्विज॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज! पूर्णिमा, अमावस्या, अष्टमी अथवा द्वादशी को इसका पाठ करने से मनुष्य को गौ दान का फल मिलता है। 38.
 
O twice born person! By reciting this on the Poornima, Amavasya, Ashtami or Dwadashi, a person gets the reward of donating a cow. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)