श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 20: प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति और भगवान‍्का आविर्भाव  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.20.37 
अहोरात्रकृतं पापं प्रह्लादचरितं नर:।
शृण्वन‍्पठंश्च मैत्रेय व्यपोहति न संशय:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्रह्लाद की कथा सुनने या पढ़ने से मनुष्य दिन-रात किए हुए पापों से अवश्य ही मुक्त हो जाता है ॥ 37॥
 
O Maitreya! There is no doubt that by listening to or reading the story of Prahlada, a person is certainly freed from the sins committed day and night. ॥ 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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