श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 20: प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति और भगवान‍्का आविर्भाव  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.20.29 
श्रीपराशर उवाच
इत्युक्त्वान‍्तर्दधे विष्णुस्तस्य मैत्रेय पश्यत:।
स चापि पुनरागम्य ववन्दे चरणौ पितु:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले - हे मैत्रेय! ऐसा कहकर भगवान उसके सामने से अन्तर्धान हो गये और उसने भी लौटकर अपने पिता के चरणों में प्रार्थना की।
 
Shri Parashara said - O Maitreya! Having said this, the Lord disappeared in front of him and he too came back and prayed at his father's feet.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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