श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 20: प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति और भगवान‍्का आविर्भाव  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.20.28 
श्रीभगवानुवाच
यथा ते निश्चलं चेतो मयि भक्तिसमन्वितम्।
तथा त्वं मत्प्रसादेन निर्वाणं परमाप्स्यसि॥ २८॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्री ने कहा - हे प्रह्लाद! मेरी भक्ति से तुम्हारा मन शान्त होने के कारण, मेरी कृपा से तुम परम निर्वाण को प्राप्त करोगे॥28॥
 
Lord Shri said – O Prahlad! Due to the calmness of your mind with my devotion, you will attain supreme nirvana by my grace. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)