श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 20: प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति और भगवान‍्का आविर्भाव  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.20.25 
श्रीभगवानुवाच
प्रह्लाद सर्वमेतत्ते मत्प्रसादाद्भविष्यति।
अन्यच्च ते वरं दद्मि व्रियतामसुरात्मज॥ २५॥
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले- हे प्रह्लाद! मेरी कृपा से तुम्हारी सभी इच्छाएँ पूरी होंगी। हे दैत्यपुत्र! मैं तुम्हें एक और वर देता हूँ, जो चाहो माँग लो॥ 25॥
 
Sri Bhagavan said- O Prahlad! By my grace all your wishes will be fulfilled. O son of the demons! I give you one more boon, ask for whatever you wish.॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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