श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 20: प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति और भगवान‍्का आविर्भाव  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.20.18 
प्रह्लाद उवाच
नाथ योनिसहस्रेषु येषु येषु व्रजाम्यहम्।
तेषु तेष्वच्युताभक्तिरच्युतास्तु सदा त्वयि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
प्रह्लाद बोले, "हे प्रभु! हे अच्युत! मैं सहस्रों योनियों में से जिस किसी योनि में जाऊँ, आपके प्रति मेरी भक्ति सदैव अक्षुण्ण रहे।"
 
Prahlada said, "O Lord! Whichever of the thousands of species I go to, O Achyuta! May my devotion towards you always remain intact."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)