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vishnu 1.2.70: सर्वव्यापी, वर देने वाले और प्रार्थना के योग्य परमेश्वर विष्णु ही ब्रह्मा आदि अनेक अवस्थाओं से सृष्टिकर्ता हैं, वे ही उत्पन्न करने वाले हैं, वे ही पालन करने वाले हैं, वे ही पालन किए जाने वाले हैं, वे ही संहार करने वाले हैं [और वे ही स्वयं नष्ट हो जाते हैं] ॥70॥   |   vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  1.2.70 
स एव सृज्य: स च सर्गकर्ता
स एव पात्यत्ति च पाल्यते च।
ब्रह्माद्यवस्थाभिरशेषमूर्ति-
र्विष्णुर्वरिष्ठो वरदो वरेण्य:॥ ७० ॥
 
 
अनुवाद
सर्वव्यापी, वर देने वाले और प्रार्थना के योग्य परमेश्वर विष्णु ही ब्रह्मा आदि अनेक अवस्थाओं से सृष्टिकर्ता हैं, वे ही उत्पन्न करने वाले हैं, वे ही पालन करने वाले हैं, वे ही पालन किए जाने वाले हैं, वे ही संहार करने वाले हैं [और वे ही स्वयं नष्ट हो जाते हैं] ॥70॥
 
The all-pervading, bestowing boons and being worthy of prayer, the Supreme Lord Vishnu is the creator through the various states such as Brahma, He is the one who is created, He is the one who nurtures, He is the one who is nurtured, He is the one who destroys [and He is Himself destroyed]. ॥ 70॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे प्रथमेंऽशे द्वितीयोऽध्याय:॥ २॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)