Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
vishnu 1.2.63: हे मैत्रेय! तब कल्प के अन्त में जनार्दन विष्णु स्वयं रुद्र रूप धारण करते हैं जो अंधकार से युक्त हैं और सम्पूर्ण प्राणियों को खा जाते हैं॥ 63॥   |   vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  1.2.63 
तमोद्रेकी च कल्पान्ते रुद्ररूपी जनार्दन:।
मैत्रेयाखिलभूतानि भक्षयत्यतिदारुण:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! तब कल्प के अन्त में जनार्दन विष्णु स्वयं रुद्र रूप धारण करते हैं जो अंधकार से युक्त हैं और सम्पूर्ण प्राणियों को खा जाते हैं॥ 63॥
 
O Maitreya! Then at the end of the kalpa, Janardan Vishnu himself assumes the form of Rudra who is dominated by darkness and devours all creatures. ॥ 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)