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vishnu 1.2.61: उसमें स्थित भगवान विश्वेश्वर भगवान विष्णु स्वयं रजोगुण का आश्रय लेकर इस जगत् की रचना में प्रवृत्त होते हैं ॥61॥   |   vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  1.2.61 
जुषन् रजो गुणं तत्र स्वयं विश्वेश्वरो हरि:।
ब्रह्मा भूत्वास्य जगतो विसृष्टौ सम्प्रवर्त्तते॥ ६१ ॥
 
 
अनुवाद
उसमें स्थित भगवान विश्वेश्वर भगवान विष्णु स्वयं रजोगुण का आश्रय लेकर इस जगत् की रचना में प्रवृत्त होते हैं ॥61॥
 
Lord Vishveshwar, Lord Vishnu himself situated in it, takes the shelter of Rajoguna and gets engaged in the creation of this world. 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)