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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा
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श्लोक 56
श्लोक
1.2.56
तत्राव्यक्तस्वरूपोऽसौ व्यक्तरूपो जगत्पति:।
विष्णुर्ब्रह्मस्वरूपेण स्वयमेव व्यवस्थित:॥ ५६ ॥
अनुवाद
उसमें जगत्पति विष्णु का अव्यक्त रूप स्वयं हिरण्यगर्भ के व्यक्त रूप में निवास करता था ॥56॥
In it, the unmanifested form of Jagatpati Vishnu himself resided in the manifest form of Hiranyagarbha. 56॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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