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vishnu 1.2.55: हे महाबुद्ध! जल के बुदबुदे के समान वह गोलाकार रूप तत्त्वों से क्रमशः बढ़ता गया और जल पर स्थित होकर वह महान अण्ड ब्रह्मारूपी विष्णु का उत्तम स्वाभाविक आधार (हिरण्यगर्भ) हो गया॥55॥   |   vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.2.55 
तत्क्रमेण विवृद्धं सज्जलबु द‍्बु दवत्समम्।
भूतेभ्योऽण्डं महाबुद्धे महत्तदुदकेशयम्।
प्राकृतं ब्रह्मरूपस्य विष्णो: स्थानमनुत्तमम्॥ ५५ ॥
 
 
अनुवाद
हे महाबुद्ध! जल के बुदबुदे के समान वह गोलाकार रूप तत्त्वों से क्रमशः बढ़ता गया और जल पर स्थित होकर वह महान अण्ड ब्रह्मारूपी विष्णु का उत्तम स्वाभाविक आधार (हिरण्यगर्भ) हो गया॥55॥
 
O great Buddha! Like a bubble of water, that spherical form gradually increased from the elements and situated on the water, that great egg became the best natural foundation of Vishnu in the form of Brahma (Hiranyagarbha). ॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)