Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
vishnu 1.2.53-54: अतः प्राण से लेकर विशेष तक प्रकृति के ये सभी विकार, जो एक दूसरे पर आश्रित थे और उसी संगम को उत्पन्न करने के उद्देश्य से थे, तथा पुरुष पर आश्रित होने के कारण, प्रधान तत्त्व की कृपा से एकत्रित होकर एक हो गए और अण्ड को जन्म दिया ॥53-54॥   |   vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा  »  श्लोक 53-54
 
 
श्लोक  1.2.53-54 
समेत्यान्योन्यसंयोगं परस्परसमाश्रया:।
एकसङ्घातलक्ष्याश्च सम्प्राप्यैक्यमशेषत:॥ ५३ ॥
पुरुषाधिष्ठितत्वाच्च प्रधानानुग्रहेण च।
महदाद्या विशेषान्ता ह्यण्डमुत्पादयन्ति ते॥ ५४ ॥
 
 
अनुवाद
अतः प्राण से लेकर विशेष तक प्रकृति के ये सभी विकार, जो एक दूसरे पर आश्रित थे और उसी संगम को उत्पन्न करने के उद्देश्य से थे, तथा पुरुष पर आश्रित होने के कारण, प्रधान तत्त्व की कृपा से एकत्रित होकर एक हो गए और अण्ड को जन्म दिया ॥53-54॥
 
Therefore, all these vices of nature, from the vital principle to the special ones, which were dependent on each other and had the aim of creating the same confluence, and being dependent on the Purusha, came together and became one with the grace of the prime element and gave birth to the egg. 53-54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)