vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा
»
श्लोक 51
श्लोक
1.2.51
शान्ता घोराश्च मूढाश्च विशेषास्तेन ते स्मृता:॥ ५१॥
अनुवाद
ये पाँचों तत्त्व शान्त, उग्र और मंद हैं [अर्थात् सुख, दुःख और आसक्ति से युक्त हैं], इसलिए इन्हें विशेष कहते हैं॥ 51॥
These five elements are calm, fierce and dull [i.e., they are filled with happiness, sorrow and attachment] and hence they are called special*॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×