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vishnu 1.2.48: हे द्विज! त्वचा, नेत्र, नासिका, जिह्वा और श्रोत्र - ये पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ हैं जो बुद्धि के द्वारा शब्द आदि विषयों को ग्रहण करती हैं ॥48॥   |   vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.2.48 
त्वक्चक्षुर्नासिकाजिह्वाश्रोत्रमत्र च पञ्चमम्।
शब्दादीनामवाप्त्यर्थं बुद्धियुक्तानि वै द्विज॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज! त्वचा, नेत्र, नासिका, जिह्वा और श्रोत्र - ये पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ हैं जो बुद्धि के द्वारा शब्द आदि विषयों को ग्रहण करती हैं ॥48॥
 
Hey Dwija! Skin, eyes, nose, tongue and hearing - these five are the five sense organs which receive the subjects like words etc. with the help of intellect. 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)