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त्वक्चक्षुर्नासिकाजिह्वाश्रोत्रमत्र च पञ्चमम्।
शब्दादीनामवाप्त्यर्थं बुद्धियुक्तानि वै द्विज॥ ४८॥
अनुवाद
हे द्विज! त्वचा, नेत्र, नासिका, जिह्वा और श्रोत्र - ये पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ हैं जो बुद्धि के द्वारा शब्द आदि विषयों को ग्रहण करती हैं ॥48॥
Hey Dwija! Skin, eyes, nose, tongue and hearing - these five are the five sense organs which receive the subjects like words etc. with the help of intellect. 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥