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vishnu 1.2.47: दस इन्द्रियाँ तैजस अर्थात् राजसिक अहंकार से उत्पन्न कही गई हैं और उनका अधिष्ठाता देवता वैकारिक अर्थात् सात्विक अहंकार से उत्पन्न कहा गया है। इस प्रकार इन्द्रियों के अधिष्ठाता देवता दस देवता हैं और ग्यारहवाँ मन वैकारिक (सात्त्विक) है। 47॥   |   vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.2.47 
तैजसानीन्द्रियाण्याहुर्देवा वैकारिका दश।
एकादशं मनश्चात्र देवा वैकारिका: स्मृता:॥ ४७ ॥
 
 
अनुवाद
दस इन्द्रियाँ तैजस अर्थात् राजसिक अहंकार से उत्पन्न कही गई हैं और उनका अधिष्ठाता देवता वैकारिक अर्थात् सात्विक अहंकार से उत्पन्न कहा गया है। इस प्रकार इन्द्रियों के अधिष्ठाता देवता दस देवता हैं और ग्यारहवाँ मन वैकारिक (सात्त्विक) है। 47॥
 
The ten senses are said to be born from Taijas i.e. Rajasic ego and their presiding deity is said to be born from Vaikarik i.e. Satvik ego. In this way, the presiding deities of the senses are ten gods and the eleventh mind is Vaikarik (Sattvik). 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)