Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 1.2.46: वे विशेष तन्मात्राएँ शान्त, उग्र या मूढ़ नहीं हैं [अर्थात् सुख, दुःख या आसक्ति के रूप में उनका अनुभव नहीं किया जा सकता]। इस प्रकार यह भूत-तन्मात्रा रूप तामसिक अहंकार से उत्पन्न हुआ है ॥46॥ | vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा । vishnu अंश 1: प्रथम अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न शान्ता नापि घोरास्ते न मूढाश्चाविशेषिण:।
भूततन्मात्रसर्गोऽयमहङ्कारात्तु तामसात्॥ ४६ ॥
अनुवाद
वे विशेष तन्मात्राएँ शान्त, उग्र या मूढ़ नहीं हैं [अर्थात् सुख, दुःख या आसक्ति के रूप में उनका अनुभव नहीं किया जा सकता]। इस प्रकार यह भूत-तन्मात्रा रूप तामसिक अहंकार से उत्पन्न हुआ है ॥46॥
Those special tanmatras are not calm, fierce or foolish [that is, they cannot be experienced in the form of happiness, sorrow or attachment]. In this way, this ghost-tanmatra form has arisen from the tamasic ego. 46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥