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vishnu 1.2.45: तन्मात्राओं में कोई विशेष अर्थ नहीं होता, इसलिए उनकी अविशेष संज्ञाएँ होती हैं । 45॥   |   vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.2.45 
तन्मात्राण्यविशेषाणि अविशेषास्ततो हि ते॥ ४५ ॥
 
 
अनुवाद
तन्मात्राओं में कोई विशेष अर्थ नहीं होता, इसलिए उनकी अविशेष संज्ञाएँ होती हैं । 45॥
 
There is no special meaning in tanmatras, hence they have non-special nouns. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)