श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  1.2.43 
विकुर्वाणानि चाम्भांसि गन्धमात्रं ससर्जिरे।
सङ्घातो जायते तस्मात्तस्य गन्धो गुणो मत:॥ ४३ ॥
 
 
अनुवाद
[रस-तन्मात्रा रूप] दाह विकार को प्राप्त होकर गन्ध-तन्मात्रा उत्पन्न हुई, जिससे पृथ्वी उत्पन्न हुई जिसका गुण गंध माना गया है ॥43॥
 
[Rasa-Tanmatra form] After attaining the burning disorder, Gandha-Tanmatra was created, from which the earth was born whose quality is considered to be smell. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)