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vishnu 1.2.41: स्पर्श-तन्मात्रारूपी वायु ने रूप-तन्मात्रारूपी तेज को आवृत कर लिया। फिर [रूप-तन्मात्रामय] तेज भी विकृत होकर रस-तन्मात्रा उत्पन्न कर गया ॥41॥   |   vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  1.2.41 
स्पर्शमात्रं तु वै वायू रूपमात्रं समावृणोत्।
ज्योतिश्चापि विकुर्वाणं रसमात्रं ससर्ज ह॥ ४१ ॥
 
 
अनुवाद
स्पर्श-तन्मात्रारूपी वायु ने रूप-तन्मात्रारूपी तेज को आवृत कर लिया। फिर [रूप-तन्मात्रामय] तेज भी विकृत होकर रस-तन्मात्रा उत्पन्न कर गया ॥41॥
 
The air of touch-tanmatra form covered the light of form-tanmatra form. Then the [form-tanmatramay] Teja also got distorted and created Rasa-tanmatra. 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)