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vishnu 1.2.40: तब स्पर्श-तन्मात्रारूपी वायु ने विकृत होकर रूप-तन्मात्रा उत्पन्न की। रूप-तन्मात्रायुक्त वायु से प्रकाश उत्पन्न होता है, उसका गुण रूप कहलाता है ॥40॥   |   vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.2.40 
ततो वायुर्विकुर्वाणो रूपमात्रं ससर्ज ह।
ज्योतिरुत्पद्यते वायोस्तद्रूपगुणमुच्यते॥ ४० ॥
 
 
अनुवाद
तब स्पर्श-तन्मात्रारूपी वायु ने विकृत होकर रूप-तन्मात्रा उत्पन्न की। रूप-तन्मात्रायुक्त वायु से प्रकाश उत्पन्न होता है, उसका गुण रूप कहलाता है ॥40॥
 
Then the air [in the form of touch-tanmatra] got distorted and created the form-tanmatra. The light is produced from the air (containing form-tanmatra), its quality is called form. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)