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vishnu 1.2.4: जो विश्वरूप हैं और जगत की उत्पत्ति, पालन और संहार के मूल कारण हैं, उन परम भगवान विष्णु को नमस्कार है। ॥4॥   |   vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.2.4 
सर्गस्थितिविनाशानां जगतो यो जगन्मय:।
मूलभूतो नमस्तस्मै विष्णवे परमात्मने॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
जो विश्वरूप हैं और जगत की उत्पत्ति, पालन और संहार के मूल कारण हैं, उन परम भगवान विष्णु को नमस्कार है। ॥4॥
 
Salutations to the Supreme Lord Vishnu, who has the form of the universe and is the root cause of the creation, sustenance and destruction of the universe. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)