श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.2.39 
बलवानभवद्वायुस्तस्य स्पर्शो गुणो मत:।
आकाशं शब्दमात्रं तु स्पर्शमात्रं समावृणोत्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
उसी (स्पर्श-तन्मात्रा) से प्रचण्ड वायु उत्पन्न हुई, उसका गुण स्पर्श माना गया है। शब्द-तन्मात्रा रूपी आकाश ने स्पर्श-तन्मात्रा रूपी वायु को आवृत कर रखा है ॥39॥
 
From that (Sparsh-Tanmatra) - strong wind was created, its quality is considered to be touch. The sky in the form of word-tanmatra has covered the air in the form of touch-tanmatra. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)