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vishnu 1.2.30: जैसे गंध अपने समीपता मात्र से मन को विचलित कर देती है, यद्यपि वह सक्रिय नहीं होती, वैसे ही परमेश्वर अपने समीपता मात्र से प्रधान और मनुष्य को प्रेरित करते हैं ॥30॥   |   vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.2.30 
यथा सन्निधिमात्रेण गन्ध: क्षोभाय जायते।
मनसो नोपकर्तृत्वात्तथाऽसौ परमेश्वर:॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
जैसे गंध अपने समीपता मात्र से मन को विचलित कर देती है, यद्यपि वह सक्रिय नहीं होती, वैसे ही परमेश्वर अपने समीपता मात्र से प्रधान और मनुष्य को प्रेरित करते हैं ॥30॥
 
Just as a smell disturbs the mind by its mere proximity, even though it is not active, similarly the Supreme Lord inspires the chief and the man by His mere proximity. ॥30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)