Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 1.2.3: जो एक होते हुए भी अनेक रूप वाले, स्थूल और सूक्ष्म हैं, अव्यक्त (कारण) और व्यक्त (कार्य) हैं और [अपने अनन्य भक्तों के] मोक्ष के कारण हैं, [उन भगवान विष्णु को नमस्कार है]॥3॥ | vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा । vishnu अंश 1: प्रथम अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एकानेकस्वरूपाय स्थूलसूक्ष्मात्मने नम:।
अव्यक्तव्यक्तरूपाय विष्णवे मुक्तिहेतवे॥ ३ ॥
अनुवाद
जो एक होते हुए भी अनेक रूप वाले, स्थूल और सूक्ष्म हैं, अव्यक्त (कारण) और व्यक्त (कार्य) हैं और [अपने अनन्य भक्तों के] मोक्ष के कारण हैं, [उन भगवान विष्णु को नमस्कार है]॥3॥
Who, despite being one, has various forms, is gross and subtle, is the unmanifested (cause) and the manifest (effect) and is the cause of the salvation [of His exclusive devotees], [salutations to that Lord Vishnu]॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥