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vishnu 1.2.28-29: तत्पश्चात् (सर्गकाल के उपस्थित होने पर) सर्वव्यापी सर्वव्यापी परमात्मा के विश्वरूप परमेश्वर ने अपनी इच्छा से दुष्ट सरदार और अचर पुरुष में प्रवेश करके उन्हें क्षुब्ध कर दिया ॥28-29॥   |   vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  1.2.28-29 
ततस्तु तत्परं ब्रह्म परमात्मा जगन्मय:।
सर्वग: सर्वभूतेश: सर्वात्मा परमेश्वर:॥ २८ ॥
प्रधानपुरुषौ चापि प्रविश्यात्मेच्छया हरि:।
क्षोभयामास सम्प्राप्ते सर्गकाले व्ययाव्ययौ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् (सर्गकाल के उपस्थित होने पर) सर्वव्यापी सर्वव्यापी परमात्मा के विश्वरूप परमेश्वर ने अपनी इच्छा से दुष्ट सरदार और अचर पुरुष में प्रवेश करके उन्हें क्षुब्ध कर दिया ॥28-29॥
 
Thereafter [when Sargakaal was present] the Supreme Supreme Lord, the universal form of the omnipresent omnipresent Supreme Soul, by His will, entered into the vicious chief and the unchangeable man and irked them. 28-29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)