Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 1.2.27: हे मैत्रेय! प्रलयकाल में जब प्रधान (प्रकृति) संतुलित हो जाती है और पुरुष प्रकृति से पृथक हो जाता है, तब भगवान विष्णु का काल रूप दोनों को ग्रहण करने की ओर प्रवृत्त होता है॥27॥ | vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा । vishnu अंश 1: प्रथम अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गुणसाम्ये ततस्तस्मि न् पृथक्पुंसि व्यवस्थिते।
कालस्वरूपं तद्विष्णोर्मैत्रेय परिवर्त्तते॥ २७ ॥
अनुवाद
हे मैत्रेय! प्रलयकाल में जब प्रधान (प्रकृति) संतुलित हो जाती है और पुरुष प्रकृति से पृथक हो जाता है, तब भगवान विष्णु का काल रूप दोनों को ग्रहण करने की ओर प्रवृत्त होता है॥27॥
O Maitreya! During the time of doomsday, when Pradhan (Prakriti) becomes balanced and Purusha becomes separated from Prakriti, the Kaal form of Lord Vishnu tends to [embrace both]. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥