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vishnu 1.2.26: हे द्विज! कालस्वरूप भगवान् अनादि हैं, उनका कोई अंत नहीं है, इसलिए जगत् की उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय कभी नहीं रुकते [प्रवाह के रूप में निरन्तर होते रहते हैं]। 26॥   |   vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.2.26 
अनादिर्भग वान‍् कालो नान्तोऽस्य द्विज विद्यते।
अव्युच्छिन्नास्ततस्त्वेते सर्गस्थित्यन्तसंयमा:॥ २६ ॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज! कालस्वरूप भगवान् अनादि हैं, उनका कोई अंत नहीं है, इसलिए जगत् की उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय कभी नहीं रुकते [प्रवाह के रूप में निरन्तर होते रहते हैं]। 26॥
 
Hey Dwija! God, the form of time, is eternal, He has no end, hence the creation, existence and destruction of the world never stop [they keep happening continuously in the form of flow]. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)