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vishnu 1.2.25: पूर्व प्रलय काल में यह व्यक्त जगत् प्रकृति में लीन था, इसलिए जगत् का यह प्रलय प्राकृत प्रलय कहलाता है।   |   vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.2.25 
प्रकृतौ संस्थितं व्यक्तमतीतप्रलये तु यत्।
तस्मात्प्राकृतसंज्ञोऽयमुच्यते प्रतिसञ्चर:॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
पूर्व प्रलय काल में यह व्यक्त जगत् प्रकृति में लीन था, इसलिए जगत् का यह प्रलय प्राकृत प्रलय कहलाता है।
 
In the past period of Pralaya, this manifested world was absorbed in Prakriti; hence this destruction of the world is called Prakrit Pralaya. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)