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vishnu 1.2.24: हे विप्र! विष्णु के परम (उपाधिरहित) रूप से दो रूप हुए - प्रधान और पुरुष; उन्हीं (विष्णु) के उस दूसरे रूप का नाम, जिससे दोनों एक होते और वियोग होते हैं (सृष्टि और प्रलय के समय) 'काल' है॥24॥   |   vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.2.24 
विष्णो: स्वरूपात्परतो हि ते द्वे
रूपे प्रधानं पुरुषश्च विप्र।
तस्यैव तेऽन्येन धृते वियुक्ते
रूपान्तरं त द‍‍्द्विज कालसंज्ञम्॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
हे विप्र! विष्णु के परम (उपाधिरहित) रूप से दो रूप हुए - प्रधान और पुरुष; उन्हीं (विष्णु) के उस दूसरे रूप का नाम, जिससे दोनों एक होते और वियोग होते हैं (सृष्टि और प्रलय के समय) 'काल' है॥24॥
 
Hey Vipra! From the supreme (titleless) form of Vishnu, there were two forms – Pradhan and Purusha; The name of that other form of the same (Vishnu) through which both are united and separated [at the time of creation and destruction] is 'Kaal'. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)