Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 1.2.23: ‘उस समय (प्रलयकाल में) न दिन था, न रात, न आकाश था, न पृथ्वी, न अन्धकार था, न प्रकाश, न कुछ और। श्रोत्र-बुद्धि आदि इन्द्रियों से परे, केवल एक ही परम ब्रह्म और पुरुष थे।’॥23॥ | vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा । vishnu अंश 1: प्रथम अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नाहो न रात्रिर्न नभो न भूमि-
र्नासीत्तमोज्योतिरभूच्च नान्यत्।
श्रोत्रादिबुद्ध्यानुपलभ्यमेकं
प्राधानिकं ब्रह्म पुमांस्तदासीत्॥ २३॥
अनुवाद
‘उस समय (प्रलयकाल में) न दिन था, न रात, न आकाश था, न पृथ्वी, न अन्धकार था, न प्रकाश, न कुछ और। श्रोत्र-बुद्धि आदि इन्द्रियों से परे, केवल एक ही परम ब्रह्म और पुरुष थे।’॥23॥
‘At that time (during the Pralaya Kaal) there was neither day nor night, nor sky nor earth, nor darkness nor light nor anything else. There was only one supreme Brahma and Purusha, beyond the senses like hearing and intellect etc.’॥23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥