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vishnu 1.2.20: यह अविनाशी है, इसका कोई अन्य आधार नहीं है, यह अपरिमेय है, अजर है, गतिहीन है, शब्द, स्पर्श और रूप से रहित है।   |   vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.2.20 
अक्षय्यं नान्यदाधारममेयमजरं ध्रुवम्।
शब्दस्पर्शविहीनं तद्रूपादिभिरसंहितम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यह अविनाशी है, इसका कोई अन्य आधार नहीं है, यह अपरिमेय है, अजर है, गतिहीन है, शब्द, स्पर्श और रूप से रहित है।
 
It is indestructible, has no other base, is immeasurable, ageless, motionless, devoid of sound, touch and form.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)