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vishnu 1.2.18: इसे भगवान विष्णु की बाल-क्रीड़ा समझो, जो व्यक्त, अव्यक्त, पुरुष और काल रूप में विद्यमान हैं॥18॥   |   vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.2.18 
व्यक्तं विष्णुस्तथाव्यक्तं पुरुष: काल एव च।
क्रीडतो बालकस्येव चेष्टां तस्य निशामय॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इसे भगवान विष्णु की बाल-क्रीड़ा समझो, जो व्यक्त, अव्यक्त, पुरुष और काल रूप में विद्यमान हैं॥18॥
 
Consider this as a child's play of Lord Vishnu who is present in the form of manifest, unmanifest, man and time. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)