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vishnu 1.2.17: प्रधान, पुरुष, व्यक्त और काल- ये रूप ही भिन्न-भिन्न लोकों की उत्पत्ति, पालन और संहार के प्रकाश और उत्पादन के कारण हैं ॥17॥   |   vishnu अध्याय 1.2: चौबीस तत्त्वोंके विचारके साथ जगत‍्के उत्पत्तिक्रमका वर्णन और विष्णुकी महिमा   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.2.17 
प्रधानपुरुषव्यक्तकालास्तु प्रविभागश:।
रूपाणि स्थितिसर्गान्तव्यक्तिसद्भावहेतव:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
प्रधान, पुरुष, व्यक्त और काल- ये रूप ही भिन्न-भिन्न लोकों की उत्पत्ति, पालन और संहार के प्रकाश और उत्पादन के कारण हैं ॥17॥
 
Pradhan, Purusha, Vyakta and Kaal – these forms [of Lord Vishnu] are the reasons for the light and production of the origin, maintenance and destruction of the different worlds. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)