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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान्का सुदर्शनचक्रको भेजना
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श्लोक 80
श्लोक
1.19.80
यस्यावताररूपाणि समर्चन्ति दिवौकस:।
अपश्यन्त: परं रूपं नमस्तस्मै महात्मने॥ ८०॥
अनुवाद
उन महान् आत्माओं को नमस्कार है जिनके अवतारों की पूजा देवतागण उनके वास्तविक स्वरूप को न जानते हुए भी करते हैं ॥80॥
Salutations to those great souls whose incarnations are worshipped by the gods despite not knowing their true form. ॥ 80॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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