श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  1.19.75 
तस्माच्च सूक्ष्मादिविशेषणाना-
मगोचरे यत्परमात्मरूपम्।
किमप्यचिन्त्यं तव रूपमस्ति
तस्मै नमस्ते पुरुषोत्तमाय॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
उससे भी परे कोई अचिन्त्य परब्रह्म है, जो सूक्ष्म आदि विशेषणों से परे है। हे परब्रह्म! आपको नमस्कार है। ॥75॥
 
Beyond that, there is some inconceivable Supreme Being, who is beyond the reach of subtle etc. adjectives. Salutations to you, O Supreme Being. ॥ 75॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)