श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  1.19.74 
रूपं महत्ते स्थितमत्र विश्वं
ततश्च सूक्ष्मं जगदेतदीश।
रूपाणि सर्वाणि च भूतभेदा-
स्तेष्वन्तरात्माख्यमतीव सूक्ष्मम्॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! यह सम्पूर्ण जगत् आपका स्थूल रूप है। उससे भी सूक्ष्म यह जगत् (पृथ्वी) है, उससे भी सूक्ष्म ये सभी भिन्न-भिन्न रूप वाले प्राणी हैं; इनके भीतर स्थित अंतर्यामी आत्मा उससे भी अधिक सूक्ष्म है ॥ 74॥
 
O Lord! This entire universe is Your gross form. Subtler than that is this world (Earth), even subtler than that are all the creatures with different forms; the inner soul within them is even more subtle. ॥ 74॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)